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Un día Nuestra Gran Novela he de escribir
y revivir en un libro de rosas,
En cada hoja un juramento temblará
y ahí estará tu carita hermosa,
Pobre será mi prosa,
Mas, habrá tu encanto
Porque yo pondré tus
lágrimas
en los pétalos de la más bella rosa.

Los dos escribiremos…,
Huum huum…

Un día nuestra gran novela he de escribir
y aquel vivir,
Con sol de vacaciones,
Las ilusiones quiero bien compaginar
y la ofrenda de un Amor de Leyenda,
Y será emblema sincero
el trinar de las aves,
Y el primer “Yo te quiero”
leve cual arpegio suave.
¡No!
¡Ni una sombra angustiosa!
(Apocalipsis 21:4)
Mas…
¡Sólo tan bellas cosas!
(1ra Corintios 2:9)
Un día nuestra gran novela haré abrir
Por revivir su más bello pasaje,
Tras resoplar todo el polvo que juntó
Yo leeré… y los dos reiremos,
Para sentir esa gran pasión,

tic tac

La Iglesia dice:

Yo siempre oigo tic tac, tic tac, tic tac.     (La soledad es pasajera)  
Oigo tic tac, tic tac, tic tac.
Mi corazón ya pronto dejará de latir.

El Diablo:

Cuando miro yo el reloj no quisiera verlo más
porque pronto tú te irás y ya nunca volverás.

Por eso oigo tic tac tic tac tic tac.
Oigo tic tac tic tac tic tac.
Mi corazón ya pronto dejará de latir.

El Mesías:

No quiero ser Novio que espera     (San Mateo 25:10)
sintiendo en su cuerpo un endor.
Quisiera saber cuantas cosas
nos hace sentir el amor.              
(Se amarán, se amarán, se amarán)

La Iglesia:

Por eso oigo tic tac, tic tac, tic tac.
Oigo tic tac, tic tac, tic tac.
Mi corazón ya pronto dejará de latir.

El Mesías:

No te alejes (al pecado) dulce amor,     (San Mateo 25:13)
No quisiera verte ir, pero el tiempo llegará
en que tengas que partir.                
(1ra Tesalonicenses 4:17)

La Iglesia:

Por eso oigo tic tac, tic tac, tic tac.
Oigo tic tac, tic tac, tic tac.
Mi corazón ya pronto dejará de latir.
Por eso oigo tic tac, tic tac, tic tac.
Oigo tic tac, tic tac, tic tac.
Mi corazón ya pronto dejará de latir.
Por eso oigo tic tac, tic tac, tic tac.
Oigo tic tac, tic tac.

La Iglesia:

Como en los días de Noe…
Como en los días de Lot…

Pusieron rosas rojas en memoria de su amor.
El cielo se ha encendido con un bello resplandor.
Y ya la enamorada le ha sabido perdonar.       
Borró su culpa la oración. Por fin descansará.  
(Cualquier pecador arrepentido)

Ipiaé ipiaiió.
Jinetes por el cielo van (Apocalipsis 9:17-19) y no se detendrán.                            
Leyenda de un jinete que galopa sin cesar,              
(Cualquier pecadora)
cumpliendo la condena de cruzar la eternidad,
por traicionar en vida lo que fué su
Gran Amor,
sembrando llantos y dolor en otro corazón.
Ipiaé ipiaiió.

JINETES por el cielo van (Apocalipsis 19:11-14) y no se detendrán.              
Ipiaé ipiaiió.

jinetes por el cielo van y no se detendrán.            (Desenlace entre el BIEN y el mal)
Ipiaé ipiaiió.

Galopan sin poder parar…., jamás.                           (La justicia Divina)

                Leyenda de un jinete que galopa sin cesar,   (Cualquier pecador)
         
cumpliendo la condena de cruzar la eternidad,(Vivir para siempre pero condenado)
        
por traicionar en vida lo que fué su Gran Amor (Dios y los buenos principios)
   
sembrando llantos y dolor en otro corazón.
  Ipiaé ipiaiió.
 Jinetes por el cielo van
(Apocalipsis 6:2-8)  y no se detendrán.                      
Detrás de aquel jinete van diablos en tropel     (Pensamientos acusatorios y otras cosas)
que gritan y castigan sin descanso a su corcel.
Son tantos los amores que en su vida traicionó  (Bajo las ramas extendidas del castaño
que nunca encontrará perdón en otro corazón.   yo te vendí y tú me vendiste.)
Ipiaé ipiaiió.
Jinetes por el cielo van (Apocalipsis 9:7-11) y no se detendrán.                

नाम का अर्थ है "वह जो मनुष्य को बचाने के लिए आया था"
नाम का अर्थ है "बड़प्पन के लिए प्रसिद्ध"
नाम का अर्थ है "भगवान ने चंगा"

अंतिम चेतावनी


मुझे लगता है कि यह महत्वपूर्ण है, प्रिय पाठक, आप के लिए है करने के लिए बहुत स्पष्ट अपने मन में स्थिति में जो मानव जाति का हो सकता है जब जानवर के निशान की स्थापना की है, पृथ्वी पर एक नियम के रूप में खरीदने और बेचने के लिए.

विरोधी मसीह की स्थिति

बाइबिल कहते हैं:

"और उस ने छोटे, बड़े, धनी, कंगाल, स्‍वत्रंत, दास सब के दिहने हाथ या उन के माथे पर एक एक छाप करा दी।  कि उस को छोड़ जिस पर छाप अर्यात्‍ उस पशु का नाम, या उसके नाम का अंक हो, और कोई लेन देन न कर सके।  ज्ञान इसी में है, जिसे बुद्धि हो, वह इस पशु का अंक जोड़ ले, क्‍योंकि मनुष्य का अंक है, और उसका अंक छ: सौ छियासठ है।। " (रहस्योद्घाटन 13:16-18)

भगवान की स्थिति

बाइबल भी इस प्रकार कहती है:

फिर इन के बाद एक और स्‍वर्गदूत बड़े शब्‍द से यह कहता हुआ आया, कि जो कोई उस पशु और उस की मूरत की पूजा करे, और अपके माथे या अपके हाथ पर उस की छाप ले। तो वह परमेश्वर का प्रकोप की निरी मदिरा जो उसके क्रोध के कटोरे में डाली गई है, पीएगा और पवित्र स्‍वर्गदूतोंके साम्हने, और मेम्ने के साम्हने आग और गन्‍धक की पीड़ा में पकेगा। और उन की पीड़ा का धुआं युगानुयुग उठता रहेगा, और जो उस पशु और उस की मूरत की पूजा करते हैं, और जो उसके नाम ही छाप लेते हैं, उन को रात दिन चैन न मिलेगा। पवित्र लोगोंका धीरज इसी में है, जो परमेश्वर की आज्ञाओं को मानते, और यीशु पर विश्वास रखते हैं।। और मैं ने स्‍वर्ग से यह शब्‍द सुना, कि लिख; जो मुरदे प्रभु में मरते हैं, वे अब से धन्य हैं, आत्क़ा कहता है, हां क्‍योंकि वे अपके परिश्र्मोंसे विश्रम पाएंगे, और उन के कार्य्य उन के साय हो लेते हैं।। (प्रकाशितवाक्य 14: 9-13)।


एक जीवन और मृत्यु पृथ्वी के सभी निवासियों के लिए महान परीक्षण

एक हाथ पर, एक राक्षसी तानाशाही सरकार की स्थापना होने के लिए पृथ्वी पर की आवश्यकता होगी आप और आपके परिवार के लिए है पर एक निशान माथे या हाथ करने के क्रम में खरीदने के लिए और बेचने; और आप मजबूर हो जाएगा करने के लिए पूजा शैतान और जानवर के तहत, मौत की धमकी, तो आप मना कर दिया. यदि आप स्वीकार करते हैं की स्थिति antichrist और उन्हें आप निशान है, तो आप अपने जीवन को बचाना होगा अस्थायी रूप से, और आप खरीद सकते हैं, भोजन, पानी, पेट्रोल, कपड़े; आप खरीद सकता है सब कुछ है कि अब तक आप कर दिया गया है, वास्तव में, आप खरीद सकता है कि सब कुछ खरीदा और बेचा जाता है, लेकिन के तहत किया जाएगा छाया की बुराई और अपनी आत्मा को खो देते हैं ।  आप पृथ्वी के निवासियों में से एक होंगे, जो कि ऊपर वर्णित भगवान के क्रोध के 7 कटोरे की सजा पाएंगे। और यह एक महान परीक्षण के लिए दूसरे हाथ पर भगवान ने चेतावनी दी है मानवता के परिणामों को स्वीकार करने के जानवर के निशान और की सलाह नहीं करने के लिए आप यह स्वीकार करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह है कि अपने जीवन का एक अचानक परिवर्तन; जाहिरा तौर पर आप कार्य नहीं करेंगे दुनिया में है, क्योंकि यह मुश्किल हो जाएगा एक नौकरी पाने के लिए, यह संभव नहीं होगा भोजन खरीदने के लिए या कुछ भी है कि दुकानों में बेचा जाता है. हताशा सकता है आप लुभाना करने के लिए निशान प्राप्त करने के लिए सक्षम होना करने के लिए एक सामान्य जीवन जीने में समाज. आप के लिए मेरी सलाह है, एक ही सलाह से भगवान: नहीं प्राप्त निशान.
जो उन लोगों का मतलब है चाहिए खाते में लेने की सलाह यूसुफ (उत्पत्ति 41:25-36).लेकिन सब से ऊपर भगवान में विश्वास के रूप में, वहाँ है एक promiss के संरक्षण में, बाइबिल के पूरे राज्य भर में antichrist के रहता है, जो तीन और एक आधे साल है (देखें प्रकाशितवाक्य 13:5), के लिए उन विश्वासियों जो आज्ञाकारी किया गया है करने के लिए भगवान की आज्ञाओं (देखें प्रकाशित वाक्य 3:10, 12:6);लेकिन अगर आपको भूखा जाना है या मरना भी है तो अपने रचनाकार के प्रति वफादार होना ।  एक बार याद रखें कि सपने देखने वाला गीत एक अल्टीमेटम की तरह लगता है, दुनिया की न्याय और मुक्ति की घोषणा खुद भगवान के माध्यम से विश्वास करने के लिए हमें मजबूर होना सकारात्मक है । इसलिए, यहां तक कि अगर, पथ है norrow, भगवान पर विश्वास हो जाएगा के साथ हमारे सभी परीक्षणों के माध्यम से, अंत में हमें जीत जब वह resurrects करने के लिए हमें अनन्त जीवन खुश है ।
मैं सुझाव है कि आप किताबें "ओझा" विलियम पीटर Blatty, "शहीदों की पुस्तक" द्वारा जॉन Foxe, ”El Ayuno: Una cita con Dios” by Diana Baker और पूरे नए करार में बाइबल की सलाह के साथ, प्रेरित पौलुस कि कहते हैं: "सब बातों को साबित, तेजी से पकड़ है कि जो अच्छा है"; यह भी पढ़ें ओल्ड टैस्टमैंट में भजन 37.
मसीह आपको बताता है:

"क्‍योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे वह उसे खोएगा, पर जो कोई मेरे और सुसमाचार के लिथे
अपना प्राण खोएगा, वह उसे बचाएगा।
यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्‍त करे और अपके प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्‍या लाभ होगा

(सेंट मार्क 8:35-36)

मैं आपको बता:


मरने के लिए सुसमाचार (बेशक, बाइबिल में कुछ अवांछनीय छंदों को छोड़कर, जो परमेश्वर के चरित्र को बिगड़ता हैं) करने के लिए है
यह एक अच्छा कारण के लिए है, क्योंकि सुसमाचार द्वारा खड़ा है अच्छा आज्ञाओं और वादा
अनन्त जीवन मृत्यु के बाद;
और यह बेहतर है के वारिस के लिए एक अनन्त राज्य में बसता है जहां कानून, आदेश, खुशी और समृद्धि के लिए सभी के बजाय एक भयावह और राक्षसी के दायरे भ्रष्टाचार गरीबी और उदासी.

इन महत्वपूर्ण क्षणों में, उस सलाह को याद रखें जो कहते हैं:


"इसलिथे जागते रहो और हर समय प्रार्यना करते रहो..." (सेंट ल्यूक 21:36)


यहां मेरी फर्म की स्थिति है:


अगर मैं मरने के लिए था एक कारण के लिए, मुझे क्या करना होगा के लिए इतना है कि कोई है जो गीत के बारे में बोलती है और भगवान के लिए जो मां-जीवन है, सोच-अंतरिक्ष, अनंत, शाश्वत और निरपेक्ष रहने की जगह है, स्रोत..,


अंतिम प्रार्थना

परमेश्वर पिता और माँ के सभी अस्तित्व, चलो अपने नाम हो पवित्र और आनंद के हर कोने में अपने जा रहा है. में कठिन समय का सामना करना पड़ा द्वारा मानव जाति और शायद अन्य प्रजातियों के अन्य ग्रहों पर, मैं के लिए प्रार्थना करते हैं, अपनी समझ, न्याय, और दया के लिए सभी पापियों के वर्तमान युग में, के रूप में अच्छी तरह के रूप में सभी जीव है कि अस्तित्व में अनन्त अतीत में अपने अंतहीन जा रहा है; की अनुमति है कि कई पापियों कहा जा सकता है और कई के लिए चुना जा अनन्त जीवन; उन्हें भी सही तरीके से लाया जा सकता है, और न्याय और दया के साथ सही किया जा सकता है, जैसा कि मुझे सही किया जा रहा है, पाप के मार्ग को छोड़कर और अच्छे आज्ञाओं को प्यार करना; अपनी पवित्र आत्मा, तुम्हारा पवित्र आत्मा, हमारे अंदर एक तेल की तरह रहें जो आंतरिक प्रकाश रखता है, और दीपक के रूप में हम एक दूसरे को चमक सकते हैं, जिससे हमें इन खतरनाक समय में समझ और सहायता मिलती है; और मुझमें लगायी गई खुशी का बीज भी उन में पैदा होता है; चलो वादा करता हूँ की खुशी के लिए दिया मुझे तक पहुँचने के लिए हर प्राणी में मौजूद है कि भर में अपने अनंत जा रहा है, स्थानों से करीब निकटता में उन लोगों के लिए अगम्य लोगों के लिए हमारी कल्पना लेकिन बंद करने के लिए तुमको जो कला सर्वव्यापी; भविष्य की पीढ़ियों में पैदा होनेवाली सबकुछ एक ही आनंद का वारिस करें, शांति, समृद्धि और अनन्त सद्भाव से भरी दुनिया तलाशें;तेरे गौरवशाली राज्य आते हैं । बहुत बहुत धन्यवाद के लिए है कि कोई है जो गीत के बारे में बोलती है, जो मुझे उम्मीद है, के साथ महिमा शरीर, को पूरा करने के लिए मृत्यु के बाद. मैं पूछना है, इन सभी बातों में उसकी/उसके नाम और इस नाम के सभी प्राणियों से प्यार है, जो आप और आप का सम्मान है ।  आप सार्वभौमिक मन हैं; आप कर रहे हैं सच है ।

भगवान का आशीर्वाद, पाठक, आप और आपके परिवार के साथ हो


निष्ठा से,

Fausto A. Fernández - 30 सितंबर 2016 - यू.एस.ए.

दुल्हन के लिए अंतिम गीत ...., पहले से ही स्वर्ग में महिमा।

मैं आपको अगले दो वीडियो देखने के लिए आमंत्रित करता हूं।

अध्याय 6 (7 जवानों)

1. फिर मैं ने देखा, कि मेम्ने ने उन सात मुहरोंमें से एक को खोला; और उन चारोंप्राणियोंमें से एक का गर्ज का सा शब्‍द सुना, कि आ।
2. और मैं ने दृष्‍टि की, और देखो, एक श्वेत घोड़ा है, और उसका सवार धनुष लिए हुए है: और उसे एक मुकुट दिया गया, और वह जय करता हुआ निकल कि और भी जय प्राप्‍त करे।।
3. और जब उस ने दूसरी मुहर खोली, तो मैं ने दूसरे प्राणी को यह कहते सुना, कि आ।
4. फिर एक और घोड़ा निकला, जो लाल रंग का या; उसके सवार को यह अधिक्कारने दिया गया, कि पृय्‍वी पर से मेल उठा ले, ताकि लोग एक दूसरे को वध करें; और उसे एक बड़ी तलवार दी गई।।
5. और जब उस ने तीसरी मुहर खोली, तो मैं ने तीसरे प्राणी को यह कहते सुना, कि आ: और मैं ने दृष्‍टि की, और देखो, एक काला घोड़ा है;
6. और मैं ने उन चारोंप्राणियोंके बीच में से एक शब्‍द यह कहते सुना, कि दीनार का सेर भर गेहूं, और दीनार का तीन सेर जव, और तेल, और दाख-रस की हानि न करना।।
7. और जब उस ने चौयी मुहर खोली, तो मैं ने चौथे प्राणी का शब्‍द यह कहते सुना, कि आ।
8. और मैं ने दृष्‍टि की, और देखो, एक पीला सा घोड़ा है; और उसके सवार का नाम मृत्यु है: और अधोलोक उसके पीछे पीछे है और उन्‍हें पृय्‍वी की एक चौयाई पर यह अधिक्कारने दिया गया, कि तलवार, और अकाल, और मरी, और पृय्‍वी के वनपशुओं के द्वारा लोगोंको मार डालें।।
9. और जब उस ने पांचक्की मुहर खोली, तो मैं ने वेदी के नीचे उन के प्राणोंको देखा, जो परमेश्वर के वचन के कारण, और उस गवाही के कारण जो उन्‍होंने दी यी, वध किए गए थे।
10. और उन्‍होंने बड़े शब्‍द से पुकार कर कहा; हे स्‍वामी, हे पवित्र, और सत्य; तू कब तक न्याय न करेगा और पृय्‍वी के रहनेवालोंसे हमारे लोहू का पलटा कब तक न लेगा
11. और उन में से हर एक को श्वेत वस्‍त्र दिया गया, और उन से कहा गया, कि और योड़ी देर तक विश्रम करो, जब तक कि तुम्हारे संगी दास, और भाई, जो तुम्हारी नाई वध होनेवाले हैं, उन की भी गिनती पूरी न हो ले।।
12. और जब उस ने छठवीं मुहर खोली, तो मैं ने देखा, कि एक बड़ा भुइंडोल हुआ; और सूर्य कम्मल की नाईं काला, और पूरा चन्‍द्रमा लोहू का सा हो गया।
13. और आकाश के तारे पृय्‍वी पर ऐसे गिर पके जैसे बड़ी आन्‍धी से हिलकर अंजीर के पेड़ में से कच्‍चे फल फड़ते हैं।
14. और आकाश ऐसा सरक गया, जैसा पत्र लपेटने से सरक जाता है; और हर एक पहाड़, और टापू, अपके अपके स्यान से टल गया।
15. और पृय्‍वी के राजा, और प्रधान, और सरदार, और धनवान और सामर्यी लोग, और हर एक दास, और हर एक स्‍वतंत्र, पहाड़ोंकी खोहोंमें, और चटानोंमें जा छिपे।
16. और पहाड़ों, और चटानोंसे कहने लगे, कि हम पर गिर पड़ो; और हमें उसके मुंह से जो सिंहासन पर बैठा है और मेम्ने के प्रकोप से छिपा लो।
17. क्‍योंकि उन के प्रकोप का भयानक दिन आ पहुंचा है, अब कौन ठहर सकता है

अध्याय 8


 1. और जब उस ने सातवीं मुहर खोली, तो स्‍वर्ग में आध घड़ी तक सन्नाटा छा गया।
2. और मैं ने उन सातोंस्‍वर्गदूतोंको जो परमेश्वर के साम्हने खड़े रहते हैं, देखा, और उन्‍हें सात तुरिहयां दी गईं।।
3. फिर एक और स्‍वर्गदूत सोने का धूपदान लिथे हुए आया, और वेदी के निकट खड़ा हुआ; और उस को बहुत धूप दिया गया, कि सब पवित्र लोगोंकी प्रार्यनाओं के साय उस सोनहली वेदी पर जो सिंहासन के साम्हने है चढ़ाए।
4. और उस धूप का धुआं पवित्र लोगोंकी प्रार्यनाओं सहित स्‍वर्गदूत के हाथ से परमेश्वर के साम्हने पहुंच गया।
5. और स्‍वर्गदूत ने धूपदान लेकर उस में वेदी की आग भरी, और पृय्‍वी पर डाल दी, और गर्जन और शब्‍द और बिजलियां और भूईडोल होने लगा।।
6. और वे सातोंस्‍वर्गदूत जिन के पास सात तुरिहयां यी, फंूकने को तैयार हुए।।
7. पहिले स्‍वर्गदूत ने तुरही फूंकी, और लोहू से मिले हुए ओले और आग उत्‍पन्न हुई, और पृय्‍वी पर डाली गई; और पृय्‍वी की एक तिहाई जल गई, और सब हरी घास भी जल गई।।
8. और दूसरे स्‍वर्गदूत ने तुरही फूंकी, तो मानो आग सा जलता हुआ एक बड़ा पहाड़ समुद्र में डाला गया; और समुद्र का एक तिहाई लोहू हो गया।
9. और समुद्र की एक तिहाई सृजी हुई वस्‍तुएं जो सजीव यीं मर गई, और एक तिहाई जहाज नाश हो गया।।
10. और तीसरे स्‍वर्गदूत ने तुरही फूंकी, और एक बड़ा तारा जो मशाल की नाई जलता या, स्‍वर्ग से टूटा, और नदियोंकी एक तिहाई पर, और पानी के सोतोंपर आ पड़ा
11. और उस तोर का नाम नागदौना कहलाता है, और एक तिहाई पानी नागदौना सा कड़वा हो गया, और बहुतेरे मनुष्य उस पानी के कड़वे हो जाने से मर गए।।
12. और चौथे स्‍वर्गदूत ने तुरही फूंकी, और सूर्य की एक तिहाई, और चान्‍द की एक तिहाई और तारोंकी एक तिहाई पर आपत्ति आई, यहां तक कि उन का एक तिहाई अंग अन्‍धेरा हो गया और दिन की एक तिहाई में उजाला न रहा, और वैसे ही रात में भी।।
13. और जब मैं ने फिर देखा, तो आकाश के बीच में एक उकाब को उड़ते और ऊंचे शब्‍द से यह कहते सुना, कि उन तीन स्‍वर्गदूतोंकी तुरही के शब्‍दोंके कारण जिन का फूंकना अभी बाकी है, पृय्‍वी के रहनेवालोंपर हाथ! हाथ! हाथ!

अध्याय 9

1. और जब पांचवें स्‍वर्गदूत ने तुरही फूंकी, तो मैं ने स्‍वर्ग से पृय्‍वी पर एक तारा गिरता हुआ देखा, और उसे अयाह कुण्‍ड की कुंजी दी गई।
2. और उस ने अयाह कुण्‍ड को खोला, और कुण्‍ड में से बड़ी भट्टी का सा धुआं उठा, और कुण्‍ड के धुएं से सूर्य और वायु अन्‍धयारी हो गई।
3. और उस धुएं में से पृय्‍वी पर ट्टिड्डियाँ निकलीं, और उन्‍हें पृय्‍वी के बिच्‍छुओं की सी शक्ति दी गई।
4. और उन से कहा गया, कि न पृय्‍वी की घास को, न किसी हिरयाली को, न किसी पेड़ को हानि पहुंचाओ, केवल उन मनुष्योंको जिन के माथे पर परमेश्वर की मुहर नहीं है।
5. और उन्‍हें मार डालते का तो नहीं, पर पांच महीने तक लोगोंको पीड़ा देने का अधिक्कारने दिया गया: और उन की पीड़ा ऐसी यी, जैसे बिच्‍छू के डंक मारने से मनुष्य को होती है।
6. उन दिनोंमें मनुष्य मृत्यु को ढूंढ़ेंगे, ओर न पाएंगे; और मरने की लालसा करेंगे, और मृत्यु उस से भागेगी।
7. और उन िटिड्डयोंके आकार लड़ाई के लिथे तैयार किए हुए घोड़ोंके से थे, और उन के सिरोंपर मानोंसोने के मुकुट थे; और उसके मुंह मनुष्योंके से थे।
8. और उन के बाल स्‍त्रियोंके से, और दांत सिहोंके से थे।
9. और वे लोहे की सी फिलम पहिने थे, और उन के पंखोंका शब्‍द ऐसा या जैसा रयोंऔर बहुत से घोड़ोंका जो लड़ाई में दौड़ते हों।
10. और उन की पूंछ बिच्‍छुओं की सी यीं, और उन में डंक थे, और उन्‍हें पांच महीने तक मनुष्योंको दुख पहुंचाने की जो सामर्य यी, वह उन की पूंछोंमें यी।
11. अयाह कुण्‍ड का दूत उन पर राजा या, उसका नाम इब्रानी में अबद्दोन, और यूनानी में अपुल्लयोन है।।
12. पहिली विपत्ति बीत चुकी, देखो अब इन के बाद दो विपत्तियां और होनेवाली हैं।।
13. और जब छठवें स्‍वर्गदूत ने तुरही फंूकी तो जो सोने की वेदी परमेश्वर के साम्हने है उसके सींगो में से मैं ने ऐसा शब्‍द सुना।
14. मानोंकोई छठवें स्‍वर्गदूत से जिस के पास तुरही यी कह रहा है कि उन चार स्‍वर्गदूतोंको जो बड़ी नदी फुरात के पास बन्‍धे हुए हैं, खोल दे।
15. और वे चारोंदूत खोल दिए गए जो उस घड़ी, और दिन, और महीने, और वर्ष के लिथे मनुष्योंकी एक तिहाई के मार डालने को तैयार किए गए थे।
16. और फौजोंके सवारोंकी गिनती बीस करोड़ यी; मैं ने उन की गिनती सुनी।
17. और मुझे इस दर्शन में घोड़े और उन के ऐसे सवार दिखाई दिए, जिन की फिलमें आग, और धूम्रकान्‍त, और गन्‍धक की सी यीं, और उन घोड़ोंके सिर सिंहोंके सिरोंके से थे: और उन के मुंह से आग, और धुआं, और गन्‍धक निकलती यी।
18. इन तीनोंमरियों; अर्यात्‍ आग, और धुएं, और गन्‍धक से जो उसके मुंह से निकलती यीं, मनुष्योंकी एक तिहाई मार डाली गई।
19. क्‍योंकि उन घोड़ोंकी सामर्य उन के मुंह, और उन की पूंछोंमें यी; इसलिथे कि उन की पूंछे सांपोंकी सी यीं, और उन पूंछोंके सिर भी थे, और इन्‍हीं से वे पीड़ा पहुंचाते थे।
20. और बाकी मनुष्योंने जो उन मरियोंसे न मरे थे, अपके हाथोंके कामोंसे मन न फिराया, कि दुष्‍टात्क़ाओं की, और सोने और चान्‍दी, और पीतल, और पत्यर, और काठ की मूरतोंकी पूजा न करें, जो न देख, न सुन, न चल सकती हैं।
21. और जो खून, और टोना, और व्यभिचार, और चोरियां, उन्‍होंने की यीं, उन से मन न फिराया।।

अध्याय 10
अध्याय 11 (दो गवाहों)


1. और मुझे लग्‍गी के समान एक सरकंडा दिया गया, और किसी ने कहा; उठ, परमेश्वर के मन्‍दिर और वेदी, और उस में भजन करनेवालोंको नाप ले।
2. और मन्‍दिर के बारह का आंगन छोड़ दे; उस मत नाप, क्‍योंकि वह अन्यजातियोंको दिया गया है, और वे पवित्र नगर को बयालीस महीने तक रौंदेंगी।
3. और मैं अपके दो गवाहोंको यह अधिक्कारने दूंगा, कि टाट ओढे हुए एक हजार दो सौ साठ दिन तक भविष्यद्ववाणी करें।
4. थे वे ही जैतून के दो पेड़ और दो दीवट हैं जो पृय्‍वी के प्रभु के साम्हने खड़े रहते हैं।
5. और यदि कोई उन को हानि पहुंचाना चाहता है, तो उन के मुंह से आग निकलकर उन के बैरियोंको भस्क़ करती है, और यदि कोई उन को हानि पहुंचाना चाहेगा, तो अवश्य इसी रीति से मार डाला जाएगा।
6. इन्‍हें अधिक्कारने है, कि आकाश को बन्‍द करें, कि उन की भविष्यद्ववाणी के दिनोंमें मेंह न बरसे, और उन्‍हें सब पानी पर अधिक्कारने है, कि उसे लोहू बनाएं, और जब जब चाहें तब तब पृय्‍वी पर हर प्रकार की आपत्ति लाएं।
7. और जब वे अपक्की गवाही दे चुकेंगे, तो वह पशु जो अयाह कुण्‍ड में से निकलेगा, उन से लड़कर उन्‍हें जीतेगा और उन्‍हें मार डालेगा।
8. और उन की लोथें उस बड़े नगर के चौक में पड़ी रहेंगी, जो आत्क़िक रीति से सदोम और मिसर कहलाता है, जहां उन का प्रभु भी क्रूस पर चढ़ाया गया या।
9. और सब लोगों, और कुलों, और भाषाओं, और जातियोंमें से लोग उन की लोथें साढ़े तीन दिन तक देखते रहेंगे, और उन की लोथें कब्र में रखने ने देंगे।
10. और पृय्‍वी के रहनेवाले, उन के मरने से आनन्‍दित और मगन होंगे, और एक दूसरे के पास भेंट भेजेंगे, क्‍योंकि इन दोनोंभविष्यद्वक्ताओं ने पृय्‍वी के रहनेवालोंको सताया या
11. और साढ़े तीन दिन के बाद परमेश्वर की ओर से जीवन की आत्क़ा उन में पैठ गई; और वे अपके पांवोंके बल खड़े हो गए, और उनके देखनेवालोंपर बड़ा भय छा गया।
12. और उन्‍हें स्‍वर्ग से एक बड़ा शब्‍द सुनाई दिया, कि यहां ऊपर आओ; यह सुन वे बादल पर सवार होकर अपके बैरियोंके देखते देखते स्‍वर्ग पर चढ़ गए।
13. फिर उसी घड़ी एक बड़ा भुइंडोल हुआ, और नगर का दसवां अंश गिर पड़ा; और उस भुइंडोल से सात हजार मनुष्य मर गए और शेष डर गए, और स्‍वर्ग के परमेश्वर की महिमा की।।
14. दूसरी विपत्ति बीत चुकी, देखो, तीसरी विपत्ति शीघ्र आनेवाली है।।
15. और जब सातवें दूत ने तुरही फूंकी, तो स्‍वर्ग में इस विषय के बड़े बड़े शब्‍द होने लगे कि जगत का राज्य हमारे प्रभु का, और उसके मसीह का हो गया।
16. और वह युगानुयुग राज्य करेगा, और चौबीसोंप्राचीन जो परमेश्वर के साम्हने अपके अपके सिंहासन पर बैठे थे, मुंह के बल गिरकर परमेश्वर को दण्‍डवत करके।
17. यह कहने लगे, कि हे सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर, जो है, और जो या, हम तेरा धन्यवाद करते हैं, कि तू ने अपक्की बड़ी सार्म्य काम में लाकर राज्य किया है।
18. और अन्यजातियोंने क्रोध किया, और तेरा प्रकोप आ पड़ा और वह समय आ पहुंचा है, कि मरे हुओं का न्याय किया जाए, और तेरे दास भविष्यद्वक्ताओं और पवित्र लोगोंको और उन छोटे बड़ोंको जो तेरे नाम से डरते हैं, बदला दिया जाए, और पृय्‍वी के बिगाड़नेवाले नाश किए जाएं।।
19. और परमेश्वर का जो मन्‍दिर स्‍वर्ग में है, वह खोला गया, और उसके मन्‍दिर में उस की वाचा का सन्‍दूक दिखाई दिया, और बिजलियां और शब्‍द और गर्जन और भुइंडोल हुए, और बड़े बड़े ओले पके।।

अध्याय 12
अध्याय 13

 1. और मैं ने एक पशु को समुद्र में से निकलते हुए देखा, जिस के दस सींग और सात सिर थे; और उसके सिरोंपर निन्‍दा के नाम लिखे हुए थे।
2. और जो पशु मैं ने देखा, वह चीते की नाई या; और उसके पांव भालू के से, और मुंह सिंह का सा या; और उस अजगर ने अपक्की सामर्य, और अपना सिंहासन, और बड़ा अधिक्कारने, उसे दे दिया।
3. और मैं ने उसके सिरोंमें से एक पर ऐसा भारी घाव लगा देखा, मानो वह माने पर है; फिर उसका प्राणघातक घाव अच्‍छा हो गया, और सारी पृय्‍वी के लोग उस पशु के पीछे पीछे अचंभा करते हुए चले।
4. और उन्‍होंने अजगर की पूजा की, क्‍योंकि उस ने पशु को अपना अधिक्कारने दे दिया या और यह कहकर पशु की पूजा की, कि इस पशु के समान कौन है
5. कौन उस से लड़ सकता है और बड़े बोल बोलने और निन्‍दा करने के लिथे उसे एक मुंह दिया गया, और उसे बयालीस महीने तक काम करने का अधिक्कारने दिया गया।
6. और उस ने परमेश्वर की निन्‍दा करने के लिथे मुंह खोला, कि उसके नाम और उसके तम्बू अर्यात्‍ स्‍वर्ग के रहनेवालोंकी निन्‍दा करे।
7. और उसे यह अधिक्कारने दिया गया, कि पवित्र लोगोंसे लड़े, और उन पर जय पाए, और उसे हर एक कुल, और लोग, और भाषा, और जाति पर अधिक्कारने दिया गया।
8. और पृय्‍वी के वे सब रहनेवाले जिन के नाम उस मेम्ने की जीवन की पुस्‍तक में लिखे नहीं गए, जो जंगल की उत्‍पत्ति के समय से घात हुआ है, उस पशु की पूजा करेंगे।
9. जिस के कान होंवह सुने।
10. जिस को कैद में पड़ना है, वह कैद में पकेगा, जो तलवार से मारेगा, अवश्य है कि वह तलवार से मारा जाएगा, पवित्र लोगोंका धीरज और विश्वास इसी में है।।
11. फिर मैं ने एक और पशु को पृय्‍वी में से निकलते हुए देखा, उसके मेम्ने के से दो सींग थे; और वह अजगर की नाईं बोलता या।
12. और यह उस पहिले पशु का सारा अधिक्कारने उसके साम्हने काम में लाता या, और पृय्‍वी और उसके रहनेवालोंसे उस पहिले पशु की जिस का प्राणघातक घाव अच्‍छा हो गया या, पूजा कराता या।
13. और वह बड़े बड़े चिन्‍ह दिखाता या, यहां तक कि मनुष्योंके साम्हने स्‍वर्ग से पृय्‍वी पर आग बरसा देता या।
14. और उन चिन्‍होंके कारण जिन्‍हें उस पशु के साम्हने दिखाने का अधिक्कारने उसे दिया गया या; वह पृय्‍वी के रहनेवालोंको इस प्रकार भरमाता या, कि पृय्‍वी के रहनेवालोंसे कहता या, कि जिस पशु के तलवार लगी यी, वह जी गया है, उस की मूरत बनाओ।
15. और उसे उस पशु की मूरत में प्राण डालने का अधिक्कारने दिया गया, कि पशु की मूरत बोलने लगे; और जितने लोग उस पशु की मूरत की पूजा न करें, उन्‍हें मरवा डाले।
16. और उस ने छोटे, बड़े, धनी, कंगाल, स्‍वत्रंत, दास सब के दिहने हाथ या उन के माथे पर एक एक छाप करा दी।
17. कि उस को छोड़ जिस पर छाप अर्यात्‍ उस पशु का नाम, या उसके नाम का अंक हो, और कोई लेन देन न कर सके।
18. ज्ञान इसी में है, जिसे बुद्धि हो, वह इस पशु का अंक जोड़ ले, क्‍योंकि मनुष्य का अंक है, और उसका अंक छ: सौ छियासठ है।।

अध्याय 14

1. फिर मैं ने दृष्‍टि की, और देखो, वह मेम्ना सिय्योन पहाड़ पर खड़ा है, और उसके साय एक लाख चौआलीस हजार जन हैं, जिन के माथे पर उसका और उसके पिता का नाम लिखा हुआ है।
2. और स्‍वर्ग से मुझे एक ऐसा शब्‍द सुनाई दिया, जो जल की बहुत धाराओं और बड़े गर्जन का सा शब्‍द या, और जो शब्‍द मैं ने सुना; वह ऐसा या, मानो वीणा बजानेवाले वीणा बजाते हों।
3. और वे सिंहासन के साम्हने और चारोंप्राणियोंऔर प्राचीनोंके साम्हने मानो, यह नया गीत गा रहे थे, और उन एक लाख चौआलीस हजार जनो को छोड़ जो मोल लिए गए थे, कोई वह गीत न सीख सकता या।
4. थे वे हैं, जो स्‍त्रियोंके साय अशुद्ध नहीं हुए, पर कुंवारे हैं: थे वे ही हैं, कि जहां कहीं मेम्ना जाता है, वे उसके पीछे हो लेते हैं: थे तो परमेश्वर के निमित्त पहिले फल होने के लिथे मनुष्योंमें से मोल लिए गए हैं।
5. और उन के मुंह से कभी फूठ न निकला या, वे निर्दोष हैं।।
6. फिर मैं ने एक और स्‍वर्गदूत को आकाश के बीच में उड़ते हुए देखा जिस के पास पृय्‍वी पर के रहनेवालोंकी हर एक जाति, और कुल, और भाषा, और लोगोंको सुनाने के लिथे सनातन सुसमाचार या।
7. और उस ने बड़े शब्‍द से कहा; परमेश्वर से डरो; और उस की महिमा करो; क्‍योंकि उसके न्याय करने का समय आ पहुंचा है, और उसका भजन करो, जिस ने स्‍वर्ग और पृय्‍वी और समुद्र और जल के सोते
बनाए।।
8. फिर इस के बाद एक और दूसरा स्‍वर्गदूत यह कहता हुआ आया, कि गिर पड़ा, वह बड़ा बाबुल गिर पड़ा जिस ने अपके व्यभिचार की कोपमय मदिरा सारी जातियोंको पिलाई है।।
9. फिर इन के बाद एक और स्‍वर्गदूत बड़े शब्‍द से यह कहता हुआ आया, कि जो कोई उस पशु और उस की मूरत की पूजा करे, और अपके माथे या अपके हाथ पर उस की छाप ले।
10. तो वह परमेश्वर का प्रकोप की निरी मदिरा जो उसके क्रोध के कटोरे में डाली गई है, पीएगा और पवित्र स्‍वर्गदूतोंके साम्हने, और मेम्ने के साम्हने आग और गन्‍धक की पीड़ा में पकेगा।
11. और उन की पीड़ा का धुआं युगानुयुग उठता रहेगा, और जो उस पशु और उस की मूरत की पूजा करते हैं, और जो उसके नाम ही छाप लेते हैं, उन को रात दिन चैन न मिलेगा।
12. पवित्र लोगोंका धीरज इसी में है, जो परमेश्वर की आज्ञाओं को मानते, और यीशु पर विश्वास रखते हैं।।
13. और मैं ने स्‍वर्ग से यह शब्‍द सुना, कि लिख; जो मुरदे प्रभु में मरते हैं, वे अब से धन्य हैं, आत्क़ा कहता है, हां क्‍योंकि वे अपके परिश्र्मोंसे विश्रम पाएंगे, और उन के कार्य्य उन के साय हो लेते हैं।।
14. और मैं ने दृष्‍टि की, और देखो, एक उजला बादल है, और उस बादल पर मनुष्य के पुत्र सरीखा कोई बैठा है, जिस के सिर पर सोने का मुकुट और हाथ में चोखा हंसुआ है।
15. फिर एक और स्‍वर्गदूत ने मन्‍दिर में से निकलकर, उस से जो बादल पर बैठा या, बड़े शब्‍द से पुकारकर कहा, कि अपना हंसुआ लगाकर लवनी कर, क्‍योंकि लवने का समय आ पंहुचा है, इसलिथे कि पृय्‍वी की खेती पक चुकी है।
16. सो जो बादल पर बैठा या, उस ने पृय्‍वी पर अपना हंसुआ लगाया, और पृय्‍वी की लवनी की गई।।
17. फिर एक और स्‍वर्गदूत उस मन्‍दिर में से निकला, जो स्‍वर्ग में है, और उसके पास भी चोखा हंसुआ या।
18. फिर एक और स्‍वर्गदूत जिस आग पर अधिक्कारने या, वेदी में से निकला, और जिस के पास चोखा हंसुआ या, उस से ऊंचे शब्‍द से कहा; अपना चोखा हंसुआ लगाकर पृय्‍वी की दाख लता के गुच्‍छे काट ले; क्‍योंकि उस की दाख पक चुकी है।
19. और उस स्‍वर्गदूत ने पृय्‍वी पर अपना हंसुआ डाला, और पृय्‍वी की दाख लता का फल काटकर, अपके परमेश्वर के प्रकोप के बड़े रस के कुण्‍ड में डाल दिया।
20. और नगर के बाहर उस रस कुण्‍ड में दाख रौंदे गए, और रस कुण्‍ड में से इतना लोहू निकला कि घोड़ोंके लगामोंतक पहुंचा, और सौ कोस तक बह गया।।

अध्याय 15

1. फिर मैं ने स्‍वर्ग में एक और बड़ा और अद्भुत चिन्‍ह देखा, अर्यात्‍ सात स्‍वर्गदूत जिन के पास सातोंपिछली विपत्तियां यीं, क्‍योंकि उन के हो जाने पर परमेश्वर के प्रकोप का अन्‍त है।।
2. और मैं ने आग से मिले हुए कांच का सा एक समुद्र देखा, और जो उस पशु पर, और उस की मूरत पर, और उसके नाम के अंक पर जयवन्‍त हुए थे, उन्‍हें उस कांच के समुद्र के निकट परमेश्वर की वीणाओं को लिए हुए खड़े देखा।
3. और वे परमेश्वर के दास मूसा का गीत, और मेम्ने का गीत गा गाकर कहते थे, कि हे र्स्‍वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर, तेरे कार्य्य बड़े, और अद्भुत हैं, हे युग युग के राजा, तेरी चाल ठीक और सच्‍ची है।
4. हे प्रभु, कौन तुझ से न डरेगा और तेरे नाम की महिमा न करेगा क्‍योंकि केवल तू ही पवित्र है, और सारी जातियां आकर तेरे साम्हने दण्‍डवत्‍ करेंगी, क्‍योंकि तेरे न्याय के काम प्रगट हो गए हैं।।
5. और इस के बाद मैं ने देखा, कि स्‍वर्ग में साझी के तम्बू का मन्‍दिर खोला गया।
6. और वे सातोंस्‍वर्गदूत जिन के पास सातोंविपत्तियां यीं, शुद्ध और चमकती हुई मणि पहिने हुए छाती पर सुनहले पटुके बान्‍धे हुए मन्‍दिर से निकले।
7. और उन चारोंप्राणियोंमें से एक ने उन सात स्‍वर्गदूतोंको परमेश्वर के, जो युगानुयुग जीवता है, प्रकोप से भरे हुए सात सोने के कटोरे दिए।
8. और परमेश्वर की महिमा, और उस की सामर्य के कारण मन्‍दिर धुएं से भर गया और जब तक उन सातोंस्‍वर्गदूतोंकी सातोंविपत्तियां समाप्‍त न हुई, तब तक कोई मन्‍दिर में न जा सका।।

अध्याय 16

1. फिर मैं ने मन्‍दिर में किसी को ऊंचे शब्‍द से उन सातोंस्‍वर्गदूतोंसे यह कहते सुना कि जाओ, परमेश्वर के प्रकोप के सातोंकटोरोंको पृय्‍वी पर उंडेल दो।।
2. सो पहिले ने जाकर अपना कटोरा पृय्‍वी पर उंडेल दिया। और उन मनुष्योंके जिन पर पशु की छाप यी, और जो उस की मूरत की पूजा करते थे, एक प्रकार का बुरा और दुखदाई फोड़ा निकला।।
3. और दूसरे ने अपना कटोरा समुद्र पर उंडेल दिया और वह मरे हुए का सा लोहू बन गया, और समुद्र में का हर एक जीवधारी मर गया।।
4. और तीसरे ने अपना कटोरा नदियों, और पानी के सोतोंपर उंडेल दिया, और वे लोहू बन गए।
5. और मैं ने पानी के स्‍वर्गदूत को यह कहते सुना, कि हे पवित्र, जो है, और जो या, तू न्यायी है और तू ने यह न्याय किया।
6. क्‍योंकि उन्‍होंने पवित्र लोगों, और भविष्यद्वक्ताओं को लोहू बहाथा या, और तू ने उन्‍हें लोहू पिलाया; क्‍योंकि वे इसी योग्य हैं।
7. फिर मैं ने वेदी से यह शब्‍द सुना, कि हां हे सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर, तेरे निर्णय ठीक और सच्‍चे हैं।।
8. और चौथे ने अपना कटोरा सूर्य पर उंडेल दिया, और उसे मनुष्योंको आग से फुलसा देने का अधिक्कारने दिया गया।
9. और मनुष्य बड़ी तपन से फुलस गए, और परमेश्वर के नाम की जिसे इन विपत्तियोंपर अधिक्कारने है, निन्‍दा की और उस की महिमा करने के लिथे मन न फिराया।।
10. और पांचवें ने अपना कटोरा उस पशु के सिंहासन पर उंडेल दिया और उसके राज्य पर अंधेरा छा गया; और लोग पीड़ा के मारे अपक्की अपक्की जीभ चबाने लगे।
11. और अपक्की पीड़ाओं और फोड़ोंके कारण स्‍वर्ग के परमेश्वर की निन्‍दा की; और अपके अपके कामोंसे मन न फिराया।।
12. और छठवें ने अपना कटोरा बड़ी नदी फुरात पर उंडेल दिया और उसका पानी सूख गया कि पूर्व दिशा के राजाओं के लिथे मार्ग तैयार हो जाए।
13. और मैं ने उस अजगर के मुंह से, और उस पशु के मुंह से और उस फूठे भविष्यद्वक्ता के मुंह से तीन अशुद्ध आत्क़ाओं को मेंढ़कोंके रूप में निकलते देखा।
14. थे चिन्‍ह दिखानेवाली दुष्‍टात्क़ा हैं, जो सारे संसार के राजाओं के पास निकलकर इसलिथे जाती हैं, कि उन्‍हें सर्वशक्तिमान परमेश्वर के उस बड़े दिन की लड़ाई के लिथे इकट्ठा करें।
15. देख, मैं चोर की नाई आता हूं; धन्य वह है, जो जागता रहता है, और अपके वस्‍त्र कि चौकसी करता है, कि नंगा न फिरे, और लोग उसका नंगापन न देखें।
16. और उन्‍होंने उन को उस जगह इकट्ठा किया, जो इब्रानी में हर-मगिदोन कहलाता है।।
17. और सातवें ने अपना कटोरा हवा पर उंडेल दिया, और मंदिर के सिंहासन से यह बड़ा शब्‍द हुआ, कि ?हो चुका।
18. फिर बिजलियां, और शब्‍द, और गर्जन हुए, और एक ऐसा बड़ा भुइंडोल हुआ, कि जब से मनुष्य की उत्‍पत्ति पृय्‍वी पर हुई, तब से ऐसा बड़ा भुइंडोल कभी न हुआ या।
19. और उस बड़े नगर के तीन टुकड़े हो गए, और जाति जाति के नगर गिर पके, और बड़ा बाबुल का स्क़रण परमेश्वर के यहां हुआ, कि वह अपके क्रोध की जलजलाहट की मदिरा उसे पिलाए।
20. और हर एक टापू अपक्की जगह से टल गया; और पहाड़ोंका पता न लगा।
21. और आकाश से मनुष्योंपर मन मन भर के बड़े ओले गिरे, और इसलिथे कि यह विपत्ति बहुत ही भारी यी, लोगोंने ओलोंकी विपत्ति के कारण परमेश्वर की निन्‍दा की।।
अध्याय 17
अध्याय 18
अध्याय 19

1. इस के बाद मैं ने स्‍वर्ग में मानो बड़ी भीड़ को ऊंचे शब्‍द से यह कहते सुना, कि हल्लिलूय्याह उद्धार, और महिमा, और सामर्य हमारे परमेश्वर ही की है।
2. क्‍योंकि उसके निर्णय सच्‍चे और ठीक हैं, इसलिथे कि उस ने उस बड़ी वेश्या का जो अपके व्यभिचार से पृय्‍वी को भ्रष्‍ट करती यी, न्याय किया, और उस से अपके दासोंके लोहू का पलटा लिया है।
3. फिर दूसरी बार उन्‍होंने हल्लिलूय्याह कहा: और उसके जलने का धुआं युगानुयुग उठता रहेगा।
4. और चौबीसोंप्राचीनोंऔर चारोंप्राणियोंने गिरकर परमेश्वर को दण्‍डवत्‍ किया; जो सिंहासन पर बैठा या, और कहा, आमीन, हल्लिलूय्याह।
5. और सिंहासन में से एक शब्‍द निकला, कि हे हमारे परमेश्वर से सब डरनेवाले दासों, क्‍या छोटे, क्‍या बड़े; तुम सब उस की स्‍तुति करो।
6. फिर मैं ने बड़ी भीड़ का सा, और बहुत जल का सा शब्‍द, और गर्जनोंका सा बड़ा शब्‍द सुना, कि हल्लिलूय्याह, इसलिथे कि प्रभु हमारा परमेश्वर, सर्वशक्तिमान राज्य करता है।
7. आओ, हम आनन्‍दित और मगन हों, और उस की स्‍तुति करें; क्‍योंकि मेम्ने का ब्याह आ पहुंचा: और उस की पत्‍नी ने अपके आप को तैयार कर लिया है।
8. और उस को शुद्ध और चमकदार महीन मलमल पहिनने का अधिक्कारने दिया गया, क्‍योंकि उस महीन मलमल का अर्य पवित्र लोगोंके धर्म के काम है।
9. और उस ने मुझ से कहा; यह लिख, कि धन्य वे हैं, जो मेम्ने के ब्याह के भोज में बुलाए गए हैं; फिर उस ने मुझ से कहा, थे वचन परमेश्वर के सत्य वचन हैं।
10. और मैं उस को दण्‍डवत करने के लिथे उसके पांवोंपर गिरा; उस ने मुझ से कहा; देख, ऐसा मत कर, मैं तेरा और तेरे भाइयोंका संगी दास हूं, जो यीशु की गवाही देने पर स्यिर हैं, परमेश्वर ही को दण्‍डवत्‍ कर; क्‍योंकि यीशु की गवाही भविष्यद्वाणी की आत्क़ा है।।
11. फिर मैं ने स्‍वर्ग को खुला हुआ देखा; और देखता हूं कि एक श्वेत घोड़ा है; और उस पर एक सवार है, जो विश्वास योग्य, और सत्य कहलाता है; और वह धर्म के साय न्याय और लड़ाई करता है।
12. उस की आंखे आग की ज्‍वाला हैं: और उसके सिर पर बहुत से राजमुकुट हैं; और उसका एक नाम लिखा है, जिस उस को छोड़ और कोई नहीं जानता।
13. और वह लोहू से छिड़का हुआ वस्‍त्र पहिने है: और उसका नाम परमेश्वर का वचन है।
14. और स्‍वर्ग की सेना श्वेत घोड़ोंपर सवार और श्वेत और शुद्ध मलमल पहिने हुए उसके पीछे पीछे है।
15. और जाति जाति को मारने के लिथे उसके मुंह से एक चोखी तलवार निकलती है, और वह लोहे का राजदण्‍ड लिए हुए उन पर राज्य करेगा, और वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर के भयानक प्रकोप की जलजलाहट की मदिरा के कुंड में दाख रौंदेगा।
16. और उसके वस्‍त्र और जांघ पर यह नाम लिखा है, राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु।।
17. फिर मैं ने एक स्‍वर्गदूत को सूर्य पर खड़े हुए देखा, और उस ने बड़े शब्‍द से पुकारकर आकाश के बीच में से उड़नेवाले सब पझियोंसे कहा, आओ परमेश्वर की बड़ी बियारी के लिथे इकट्ठे हो जाओ।
18. जिस से तुम राजाओं का मांस, ओर सरदारोंका मांस, और शक्तिमान पुरूषोंका मांस, और घाड़ोंका, और उन के सवारोंका मांस, और क्‍या स्‍वतंत्र, क्‍या दास, क्‍या छोटे, क्‍या बड़े, सब लोगोंका मांस
खाओ।।
19. फिर मैं ने उस पशु और पृय्‍वी के राजाओं और उन की सेनाओं को उस घोड़े के सवार, और उस की सेना से लड़ने के लिथे इकट्ठे देखा।
20. और वह पशु और उसके साय वह फूठा भविष्यद्वक्ता पकड़ा गया, जिस ने उसके साम्हने ऐसे चिन्‍ह दिखाए थे, जिन के द्वारा उस ने उन को भरमाया, जिन्‍हो ने उस पशु की छाप ली यी, और जो उस की मूरत की पूजा करते थे, थे दोनोंजीते जी उस आग की फील में जो गन्‍धक से जलती है, डाले गए।
21. और शेष लोग उस घोड़े के सवार की तलवार से जो उसके मुंह से निकलती यी, मार डाले गए; और सब पक्की उन के मांस से तृप्‍त हो गए।।

अध्याय 20

1. फिर मै ने एक स्‍वर्गदूत को स्‍वर्ग से उतरते देखा; जिस के हाथ में अयाह कुंड की कुंजी, और एक बड़ी जंजीर यी।
2. और उस ने उस अजगर, अर्यात्‍ पुराने सांप को, जो इब्‍लीस और शैतान है; पकड़ के हजार वर्ष के लिथे बान्‍ध दिया।
3. और उसे अयाह कुंड में डालकर बन्‍द कर दिया और उस पर मुहर कर दी, कि वह हजार वर्ष के पूरे होने तक जाति जाति के लोगोंको फिर न भरमाए; इस के बाद अवश्य है, कि योड़ी देर के लिथे फिर खोला जाए।।
4. फिर मैं ने सिंहासन देखे, और उन पर लोग बैठ गए, और उन को न्याय करने का अधिक्कारने दिया गया; और उन की आत्क़ाओं को भी देखा, जिन के सिर यीशु की गवाही देने और परमेश्वर के वचन के कारण काटे गए थे; और जिन्‍होंने न उस पशु की, और न उस की मूरत की पूजा की यी, और न उस की छाप अपके माथे और हाथोंपर ली यी; वे जीवित होकर मसीह के साय हजार वर्ष तक राज्य करते रहे।
5. और जब तक थे हजार वर्ष पूरे न हुए तक तक शेष मरे हुए न जी उठे; यह तो पहिला मृत्‍कोत्यान है।
6. धन्य और पवित्र वह है, जो इस पहिले पुनरूत्यान का भागी है, ऐसोंपर दूसरी मृत्यु का कुछ भी अधिक्कारने नहीं, पर वे परमेश्वर और मसीह के याजक होंगे, और उसके साय हजार वर्ष तक राज्य करेंगे।।
7. और जब हजार वर्ष पूरे हो चुकेंगे; तो शैतान कैद से छोड़ दिया जाएगा।
8. और उन जातियोंको जो पृय्‍वी के चारोंओर होंगी, अर्यात्‍ याजूज और माजूज को जिन की गिनती समुद्र की बालू के बराबर होगी, भरमाकर लड़ाई के लिथे इकट्ठे करने को निकलेगा।
9. और वे सारी पृय्‍वी पर फैल जाएंगी; और पवित्र लोगोंकी छावनी और प्रिय नगर को घेर लेंगी: और आग स्‍वर्ग से उतरकर उन्‍हें भस्क़ करेगी।
10. और उन का भरमानेवाला शैतान आग और गन्‍धक की उस फाील में, जिस में वह पशु और फूठा भविष्यद्वक्ता भी होगा, डाल दिया जाएगा, और वे रात दिन युगानुयुग पीड़ में तड़पके रहेंगे।।
11. फिर मैं ने एक बड़ा श्वेत सिंहासन और उस को जो उस पर बैठा हुआ है, देखा, जिस के साम्हने से पृय्‍वी और आकाश भाग गए, और उन के लिथे जगह न मिली।
12. फिर मैं ने छोटे बड़े सब मरे हुओं को सिंहासन के साम्हने खड़े हुए देखा, और पुस्‍तकें खोली गई; और फिर एक और पुस्‍तक खोली गईं; और फिर एक और पुस्‍तक खोली गई, अर्यात्‍ जीवन की पुस्‍तक; और जैसे उन पुस्‍तकोंमें लिखा हुआ या, उन के कामोंके अनुसार मरे हुओं का न्याय किया गया।
13. और समुद्र ने उन मरे हुओं को जो उस में थे दे दिया, और मृत्यु और अधोलोक ने उन मरे हुओं को जो उन में थे दे दिया; और उन में से हर एक के कामोंके अनुसार उन का न्याय किया गया।
14. और मृत्यु और अधोलोक भी आग की फील में डाले गए; यह आग की फील में डाले गए; यह आग की फील तो दूसरी मृत्यु है।
15. और जिस किसी का नाम जीवन की पुस्‍तक में लिखा हुआ न मिला, वह आग की फील में डाला गया।।

अध्याय 21

1. फिर मैं ने नथे आकाश और नयी पृय्‍वी को देखा, क्‍योंकि पहिला आकाश और पहिली पृय्‍वी जाती रही यी, और समुद्र भी न रहा।
2. फिर मैं ने पवित्र नगर नथे यरूशलेम को स्‍वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान यी, जो अपके पति के लिथे सिंगार किए हो।
3. फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्‍द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्योंके बीच में है; वह उन के साय डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साय रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा।
4. और वह उन की आंखोंसे सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं।
5. और जो सिंहासन पर बैठा या, उस ने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उस ने कहा, कि लिख ले, क्‍योंकि थे वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं।
6. फिर उस ने मुझ से कहा, थे बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा।
7. जो जय पाए, वही उन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।
8. पर डरपोकों, और अविश्वासियों, और घिनौनों, और हत्यारों, और व्यभिचारियों, और टोन्‍हों, और मूतिर्पूजकों, और सब फूठोंका भाग उस फील में मिलेगा, जो आग और गन्‍धक से जलती रहती है: यह दूसरी मृत्यु है।।


*** (सर्वनाश की पुस्तक का सारांश)  ***

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.......जिनके हाथों में रहस्योद्घाटन की पुस्तक छोड़ दिया है ।


गीत गीत

(जाग Ipiae)